आदिवासी नारी के बदलते आयाम
Abstract
आदिवासी नारी भारतीय समाज का एक महत्वपूर्ण किन्तु लंबे समय तक उपेक्षित हिस्सा रही है। परंपरागत रूप से आदिवासी महिलाओं की सामाजिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक भूमिकाएँ अत्यंत सशक्त रही हैं, जहाँ वे परिवार और समुदाय की संरचना में केंद्रीय स्थान रखती थीं। किन्तु वैश्वीकरण, आधुनिकीकरण, शिक्षा के प्रसार तथा सरकारी नीतियों के प्रभाव से आदिवासी नारी के जीवन में व्यापक परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। वर्तमान समय में आदिवासी महिलाएँ शिक्षा, स्वास्थ्य, राजनीति, रोजगार और सामाजिक नेतृत्व के क्षेत्रों में सक्रिय भागीदारी निभा रही हैं। इसके साथ ही वे अपने पारंपरिक ज्ञान, सांस्कृतिक विरासत और पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। हालांकि, इन सकारात्मक परिवर्तनों के बावजूद उन्हें अभी भी गरीबी, अशिक्षा, लैंगिक भेदभाव, विस्थापन तथा सांस्कृतिक क्षरण जैसी अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। अतः आदिवासी नारी के बदलते आयामों का अध्ययन न केवल उनके सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण है, बल्कि समावेशी विकास की अवधारणा को भी सुदृढ़ करता है।
मुख्य शब्द- आदिवासी नारी, महिला सशक्तिकरण, सामाजिक परिवर्तन, शिक्षा एवं जागरूकता, आर्थिक भागीदारी, सांस्कृतिक पहचान, वैश्वीकरण, लैंगिक समानता
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Copyright (c) 2025 Research Stream (eISSN 3049-2610)

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