[1]
डा० शुचि, “अभिनव गुप्त के दर्शन की प्रासंगकिता-ईश्वरप्रत्यभिज्ञादर्शन के परिप्रेक्ष्य में”, RS, vol. 2, no. 1, pp. 108–110, Apr. 2025.