विकसित भारत के सांस्कृतिक उत्कर्ष में संगीत की भूमिका

Authors

  • प्रतिमा गुप्ता

Abstract

भारत का सपना है वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनना। यह वर्ष केवल स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होने का प्रतीक ही नहीं बल्कि उस नए भारत का प्रतीक होगा जो आत्मनिर्भर, नवाचार, समावेशी और सांस्कृतिक रूप से सशक्त, समृद्ध और शक्तिशाली होगा। जब विकसित भारत की बात करते है जो उसमें केवल आर्थिक प्रगति ही नही बल्कि सांस्कृतिक विकास और मानवीय मूल्यों का उत्थान भी शामिल है। भारत की पहचान है - हमारी संस्कृति। या यूं कहे कि भारत की आत्मा उसकी संस्कृति में बसती है और उस संस्कृति का सबसे मधुर, जीवंत और प्रभावी माध्यम है - संगीत। स्ंागीत भारत के आध्यात्मिक और सामाजिक जीवन में प्राचीन काल से ही गहराई से जुड़ा हुआ है। संगीत केवल मनोरंजन का साधन ही नहीं यह आध्यात्मिक, राष्ट्रीय एकता, सामाजिक समरसता और मानवीय संवेदनाओं का अद्भूत संगम है। 2047 जक विकसित भारत की परिकल्पना तभी साकार होगी जब भारत अपनी सांस्कृतिक आतमा को जीवंत रखेगा। आर्थिक विकार और तकनीकि उन्नति सार्थक होगें जब वे भारतीय संस्कृति और संगीत के मानवीय मूल्यों के साथ जुड़े। इस दृष्टि से यह आवश्यक है कि हम अपनी सांस्कृतिक जड़ों को मजबूत करें और उनमें आधुनिकता का समुचित संतुलन स्थापित करें।
बीज शब्द:- संगीत, संास्कृतिक, नवाचार, विकसित भारत, 2047, आत्मनिर्भर, उत्कर्ष।

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Published

31-03-2026

How to Cite

प्रतिमा गुप्ता. (2026). विकसित भारत के सांस्कृतिक उत्कर्ष में संगीत की भूमिका. Research Stream EISSN 3049-2610, 3(01), 208–210. Retrieved from https://journalresearchstream.ijarms.org/index.php/rs/article/view/93

Issue

Section

Research Paper