साइबर अपराध और चुनौतियाँः भारत के संदर्भ में एक विश्लेषण
Abstract
भूमंडलीकरण की शुरुआत 1980 के दशक से हुई। भूमंडलीकरण के द्वारा राष्ट्रों के मध्य तकनीकी का तेजी से विकास हुआ। तकनीकी का आदान-प्रदान होने से लगभग विश्व के सभी देशों को इसका फायदा पहुंचा कुछ देशों को अधिक तो कुछ को कम। वर्ल्ड वाइड वेब, कंप्यूटर एवं तीव्र गति से मोबाइल के इस्तेमाल ने मानव जीवन को सरल एवं सहज बनाया है। इस टेक्नोलॉजी के प्रयोग से ही आज पूरा विश्व लाभान्वित है। वहीं कुछ लोग इस टेक्नोलॉजी का दुरुपयोग भी कर रहे हैं खुद को फायदा और दूसरों को नुकसान पहुंचा रहे हैं विशेषकर 21वीं सदी के प्रारंभ से सूचना एवं तकनीकी का विस्तार कंप्यूटर एवं मोबाइल के प्रयोग की बढ़ोतरी के चलते साइबर क्राइम एक बड़ी चुनौती के रूप में उभरा है, जो व्यक्तियों, संगठनों और राष्ट्रों की सुरक्षा को खतरे में डाल रहा है। साइबर अपराध के चलते अनेक लोग बैंक ठगी के शिकार हो रहे हैं तथा अपनी जमा पूूॅजी खो रहे हैं। साइबर अपराध आज भारत सहित संपूर्ण विश्व के लिए एक चुनौती बना हुआ है। यह शोध पत्र भारत में साइबर अपराधों के उदय, उनके प्रकारों, उत्पन्न होने वाली चुनौतियों, साइबर अधिनियमों तथा संभावित समाधानों पर केंद्रित है। डिजिटल इंडिया जैसी पहलों के बावजूद, साइबर ठगी, हैकिंग, ब्लैकमेलिंग और डिजिटल अरेस्ट जैसे अपराधों में वृद्धि हो रही है। इस शोध पत्र में साइबर से जुड़े आकड़ों के आधार पर विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है। एवं उसके आधार पर साइबर क्राइम से बचने के सुझाव भी दिए गए हैं। उसके साथ सूचना एवं तकनीकी अधिनियम सन 2000 की चर्चा की गई है प्रमुख निष्कर्षों में भारत में इंटरनेट का उपयोग करने वालों की संख्या 1 अरब पार कर चुकी है, इसके साथ ही साइबर अपराध से जुड़ी घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं।, जो 2025 के अन्त तक और अधिक बढ़ने की आशंका है। समाधान के रूप में जागरूकता, कानूनी सुधार और तकनीकी की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।
मूल शब्द- कंप्यूटर, साइबर क्राइम, बैंकिंग ठगी, डिजिटल अरेस्ट, जागरूकता, साइबर लॉज, चुनौती एवं समाधान।
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Copyright (c) 2026 Research Stream (eISSN 3049-2610)

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