उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जनपद में कृषि मशीनीकरण की चुनौतियां और संभावनाएं
Abstract
कृषि मशीनीकरण न केवल संसाधनों जैसे भूमि, श्रमिक, जल की सकारात्मक उपयोगिता प्रदान करता है बल्कि यह किसानों को बहुमूल्य समय बचाने में सहायता करता है। समय, श्रम तथा संसाधनों के तर्कसंगत उपयोग से फसलों का सतत गहनीकरण तथा फसलों का रोपण होता है इस शोध पत्र का उद्देश्य उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जनपद में फार्म मशीनीकरण की चुनौतियां और संभावनाओं के अध्ययन कर विश्लेषण करना हैं। पीलीभीत जनपद तराई क्षेत्र में स्थित राज्य का एक प्रमुख कृषि क्षेत्र हैं। कृषि यहां की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार है। गेहूं, धान और गन्ना यहां की प्रमुख फसलें हैं। यहां लगभग 96 प्रतिशत कृषि भूमि सिंचित है तथा वर्षा का वितरण प्रतिरूप व मिट्टी की उर्वरता आदि मशीनीकरण के अनुकूल कारक हैं। कृषि में मशीनीकरण से कृषि यंत्रों का उपयोग बढ़ाने व नई कृषि मशीनरी अपनाने से श्रम व समय की बचत एवं लागत में कमी, उत्पादन, उत्पादकता बढ़ाने और फसल विविधता स्थापित करने की पर्याप्त संभावनाएं मौजूद हैं। फिर भी यहाँ मशीनीकरण के समक्ष कई चुनौतियाँ हैं जैसे कि छोटे जोत आकार, लघु एवं सीमान्त कृषक, कृषकों में जागरुकता व शिक्षा व आर्थिक संसाधनों की कमी, मशीनों की ऊँची कीमतें, तकनीकी ज्ञान का अभाव तथा कृषि मशीनरी के रखरखाव की सीमित सुविधा जोखिम लेने की क्षमता का विकास न हो पाना।सरकार द्वारा कृषि मशीनीकरण को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाएँ चलाई जा रही हैं, जैसे कि कस्टम हायरिंग सेंटर की स्थापना और मशीनों पर सब्सिडी प्रदान करना। यदि किसानों को उचित प्रशिक्षण, वित्तीय सहयोग तथा सामूहिक मशीन उपयोग की व्यवस्था दी जाए, तो पीलीभीत जनपद कृषि मशीनीकरण का एक उत्कृष्ट उदाहरण बन सकता है।
मुख्य शब्द: कृषि, मशीनीकरण, किसान, चुनौतियाँ, संभावनाएँ, उत्पादकता।
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Copyright (c) 2026 Research Stream (eISSN 3049-2610)

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