शैक्षिक सुधार के एक घटक के रूप में स्वास्थ्य साक्षरताः चुनौतियाँ और अवसर

Authors

  • डॉ0 सारिका श्रीवास्तव

Abstract

स्वास्थ्य साक्षरता आधुनिक शिक्षा प्रणाली का एक महत्वपूर्ण अंग है, जो व्यक्ति के स्वास्थ्य व्यवहार, सामाजिक जागरूकता और जीवन गुणवत्ता को प्रभावित करती है। शिक्षा और स्वास्थ्य के बीच गहरा संबंध है-एक साक्षर समाज तभी स्वस्थ रह सकता है जब नागरिक स्वास्थ्य संबंधी जानकारी को समझने और व्यवहार में लाने में सक्षम हों। भारत में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के संदर्भ में स्वास्थ्य साक्षरता को शिक्षा सुधार का अभिन्न हिस्सा बनाना आवश्यक हो गया है। वर्तमान में स्वास्थ्य साक्षरता के समक्ष अनेक चुनौतियाँ हैं, जैसे ग्रामीण क्षेत्रों में संसाधनों की कमी, शिक्षकों का प्रशिक्षण अभाव, पाठ्य सामग्री की अनुपलब्धता और डिजिटल असमानता। साथ ही सामाजिक-आर्थिक विषमता और लैंगिक असंतुलन भी इसके विस्तार में बाधक हैं। तथापि, डिजिटल माध्यमों, सामुदायिक सहभागिता और नीति-स्तरीय सहयोग के माध्यम से इसे व्यापक रूप से लागू किया जा सकता है। शिक्षा सुधार की मुख्य धारा में स्वास्थ्य साक्षरता को शामिल करने से विद्यार्थियों का समग्र विकास, मानव संसाधन सशक्तिकरण और राष्ट्र की स्वास्थ्य सुरक्षा को सुदृढ़ किया जा सकता है। इसलिए, शिक्षा नीति निर्माताओं, शिक्षकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के संयुक्त प्रयास से इसे विद्यालयी और उच्च शिक्षा दोनों स्तरों पर संस्थागत रूप दिया जाना चाहिए।
मुख्य शब्दः स्वास्थ्य साक्षरता, शैक्षिक सुधार, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, स्वास्थ्य शिक्षा, सामाजिक विकास, डिजिटल शिक्षा, नीति समन्वय, मानव संसाधन विकास।

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Published

31-03-2026

How to Cite

डॉ0 सारिका श्रीवास्तव. (2026). शैक्षिक सुधार के एक घटक के रूप में स्वास्थ्य साक्षरताः चुनौतियाँ और अवसर. Research Stream EISSN 3049-2610, 3(01), 59–65. Retrieved from https://journalresearchstream.ijarms.org/index.php/rs/article/view/72

Issue

Section

Research Paper