वर्तमान समय में छात्र-केंद्रित शिक्षण और वैयक्तिकरण की उपयोगिता
Abstract
मनुष्य सामाजिक प्राणी है और उसका सर्वाेत्तम विकास समाज में रहकर ही संभव है। इस विकास की आधारशिला शिक्षा है, जो न केवल व्यक्तिगत प्रगति बल्कि परिवार, समाज और राष्ट्र के विकास में भी सहायक होती है। गुणवत्तापरक शिक्षा के लिए प्रशिक्षित शिक्षक आवश्यक हैं, क्योंकि शिक्षा केवल ज्ञान का आदान-प्रदान नहीं बल्कि व्यक्तित्व के सर्वांगीण विकास का माध्यम है। बदलते सामाजिक परिदृश्य में अब शिक्षा का केंद्र बिंदु विद्यार्थी है, जहाँ पारंपरिक शिक्षक-ज्ञानदाता की भूमिका के स्थान पर सुविधादाता की भूमिका को महत्व दिया जा रहा है।
कीवर्ड-- छात्र-केंद्रित शिक्षण , वैयक्तिकरण, सर्वांगीण विकास, अनुभव-आधारित, स्व-निर्देशित शिक्षण, गुरुकुल परंपरा आदि।
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Copyright (c) 2025 Research Stream (eISSN 3049-2610)

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