ज्योतिषशास्त्रीय में शक्ति-स्वरूप-नारी-विमर्श

Authors

  • डॉ0 आकाश

Abstract

ज्योतिषशास्त्र भारतीय संस्कृति और दर्शन का एक महत्वपूर्ण आयाम है, जिसमें नारी को शक्ति-स्वरूप के रूप में प्रतिष्ठित किया गया है। नारी के विभिन्न स्वरूप – यथा शक्ति, लक्ष्मी, सरस्वती, दुर्गा आदि – ज्योतिषीय प्रतीकों और ग्रहों से जुड़े हुए हैं, जो उसके अद्वितीय शक्ति-स्वरूप को प्रकट करते हैं। इस विमर्श में यह विश्लेषण किया गया है कि किस प्रकार नारी ज्योतिषशास्त्र में ब्रह्मांडीय और सामाजिक शक्ति का प्रतीक मानी जाती है। साथ ही, यह शोध नारी की भूमिका और उसकी स्थिति को ज्योतिषीय दृष्टिकोण से देखने का प्रयास करता है, जिससे एक समावेशी और सशक्त नारी विमर्श उभरता है। आधुनिक नारी विमर्श और शक्ति सिद्धांतों के आलोक में इस अध्ययन में ज्योतिषशास्त्र की प्राचीन धारणाओं और आधुनिक व्याख्याओं का समन्वय किया गया है। इससे यह स्पष्ट होता है कि नारी केवल सामाजिक संरचना की अंग नहीं है, अपितु ब्रह्मांडीय शक्ति और चेतना की भी वाहक है।

मुख्य शब्द- ज्योतिषशास्त्र, शक्ति-स्वरूप, नारी विमर्श, ब्रह्मांडीय शक्ति, सामाजिक संरचना, स्त्री चेतना, देवी अवधारणा, भारतीय दर्शन

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Published

30-04-2025

How to Cite

डॉ0 आकाश. (2025). ज्योतिषशास्त्रीय में शक्ति-स्वरूप-नारी-विमर्श. Research Stream (a Bi-Annual, Peer Reviewed International Journal) EISSN 3049-2610, 2(1), 67–71. Retrieved from https://journalresearchstream.ijarms.org/index.php/rs/article/view/52

Issue

Section

Research Paper