उच्च शिक्षा उन्नयन हेतु पाठ्यक्रम सुधार की आवश्यकता
Abstract
उच्च शिक्षा में वर्तमान में सशक्त कार्य करने की आवश्यकता है। मात्र दस प्रतिशत युवा आबादी ही उच्च शिक्षा तक पहुँच पा रही है तथा इसमें भी पंजीकृत विद्यार्थियों को विश्वस्तरीय शिक्षा उपलब्ध नहीं हो रही है। एक सर्वे के अनुसार भारतीय विद्यार्थी ग्रेजुएट और पोस्टग्रेजुएट के बाद भी नौकरी योग्य नहीं हैं। उनमें तार्किक क्षमता, अंकगणितीय योग्यता और विज्ञान की समझ निम्न स्तर की है।
हमारी शिक्षा मूलतः किताबी और पारंपरिक पद्धति पर आधारित है। इसने शोधपरक शिक्षा का मार्ग अवरुद्ध किया है। शिक्षा की गुणवत्ता पाठयक्रम के आधार पर तय की जाती है क्योंकि शिक्षा और पाठ्यक्रम का गहन सम्बन्ध है। शिक्षा प्रक्रिया में तीन प्रमुख घटक- शिक्षक, शिक्षार्थी, पाठयक्रम होते हैं। इन तीनों का अन्तःसम्बन्ध ही शिक्षा का स्वरूप निर्धारित करता है। सभी प्रकार के पाठयक्रम भिन्न-भिन्न उदेश्यों के आधार पर निर्धारित किये जाते हैं, जिससे वे अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर सकें।
उपरोक्त बिंदुओं के अलोक में यह समझा जा सकता है कि पाठ्यक्रम का नवीनता और वैज्ञानिकता से युक्त होना कितना आवश्यक है। यदि बेहतर विद्यार्थियों का निर्माण करना शिक्षा का उद्देश्य है तो शिक्षा को स्तरीय एवं उपयोगी बनाना परमावश्यक है। यह किताबी, रटंत और परीक्षा केन्द्रित शिक्षा पद्धति से संभव नहीं है।
की वर्ड- उच्च शिक्षा, पाठ्यक्रम, महाविद्यालय, पंजीकरण, शिक्षक, विद्यार्थी, नवाचार
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Copyright (c) 2025 Research Stream (eISSN 3049-2610)

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