प्रेमचंद के उपन्यासों में सामाजिक यथार्थ का चित्रण

Authors

  • डा0 पियंका रानी

Abstract

प्रेमचंद हिंदी साहित्य के यथार्थवादी साहित्यकारों में अग्रणी माने जाते हैं। उनके उपन्यासों में सामाजिक यथार्थ का अत्यंत सजीव और गहन चित्रण मिलता है। उन्होंने भारतीय समाज की विषमताओं, जातिगत भेदभाव, ग्रामीण जीवन की समस्याओं, आर्थिक विषमता, नारी की स्थिति, किसानों की दुर्दशा, तथा तत्कालीन समाज की नैतिक व राजनीतिक विफलताओं को अपनी रचनाओं में उकेरा है। उनके उपन्यास केवल साहित्यिक कृतियाँ न होकर सामाजिक दस्तावेज़ भी हैं। यह शोधपत्र प्रेमचंद के प्रमुख उपन्यासों- गोदान, गबन, कर्मभूमि, सेवासदन, वरदान, निर्मला आदि के माध्यम से सामाजिक यथार्थ के विभिन्न पक्षों का विश्लेषण करता है। साथ ही, यह शोध इस बात को रेखांकित करता है कि प्रेमचंद का यथार्थ केवल वर्णनात्मक नहीं, बल्कि परिवर्तनकामी और उद्देश्यपरक भी है।
कीवर्ड्स- प्रेमचंद, सामाजिक यथार्थ, हिंदी उपन्यास, गोदान, गबन, कर्मभूमि, नारी समस्या, किसान जीवन, जातिवाद, ग्रामीण समाज, यथार्थवाद, साहित्य और समाज

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Published

31-12-2024

How to Cite

डा0 पियंका रानी. (2024). प्रेमचंद के उपन्यासों में सामाजिक यथार्थ का चित्रण. Research Stream (eISSN 3049-2610), 1(02), 30–33. Retrieved from https://journalresearchstream.ijarms.org/index.php/rs/article/view/40

Issue

Section

Research Paper