मौर्य साम्राज्य का प्रशासनिक ढांचा और उसकी प्रासंगिकता

Authors

  • डा0 मुक्ता सिंह

Abstract

मौर्य साम्राज्य का प्रशासनिक ढाँचा प्राचीन भारत की सबसे संगठित और प्रभावशाली व्यवस्थाओं में से एक था। यह शासन प्रणाली सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य और उनके प्रधानमंत्री चाणक्य (कौटिल्य) द्वारा स्थापित की गई थी, जिसमें केंद्रीकृत शासन, न्यायिक व्यवस्था, और समाजिक कल्याण के सिद्धांतों को विशेष महत्व दिया गया था। मौर्य प्रशासन ने दक्ष नौकरशाही, गुप्तचर प्रणाली, और आर्थिक प्रबंधन को अत्यधिक महत्व दिया। इसके अलावा, इसने न्याय, दंड नीति, और जनकल्याण कार्यों को एक व्यवस्थित ढाँचे में स्थापित किया, जिसे सम्राट अशोक के शासनकाल में और भी मानवीय रूप में प्रस्तुत किया गया। इस शोध-पत्र में मौर्य प्रशासन के विभिन्न पहलुओंकृजैसे कि उसके संगठनात्मक ढाँचे, न्यायिक व्यवस्था, और समकालीन प्रासंगिकताकृका विश्लेषण किया गया है। मौर्य शासन की विशेषताओं और कमजोरियों पर चर्चा करते हुए यह बताया गया है कि किस प्रकार इसकी प्रणाली आज भी समकालीन भारतीय प्रशासनिक और न्यायिक ढाँचे के लिए एक प्रेरणा स्रोत बनी हुई है। इस शोध से यह स्पष्ट होता है कि मौर्य प्रशासन की सिद्धांतों और व्यवस्थाओं का अध्ययन समकालीन शासन की स्थिरता और विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
कीवर्ड- मौर्य साम्राज्य, प्रशासनिक ढाँचा, चाणक्य (कौटिल्य), केन्द्रीयकृत शासन, न्यायिक व्यवस्था, गुप्तचर प्रणाली, जनकल्याण, दंड नीति, सम्राट अशोक, विकेन्द्रीकरण, समकालीन प्रासंगिकता, भारतीय प्रशासन, प्रशासनिक सुधार

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Published

31-12-2024

How to Cite

डा0 मुक्ता सिंह. (2024). मौर्य साम्राज्य का प्रशासनिक ढांचा और उसकी प्रासंगिकता. Research Stream (eISSN 3049-2610), 1(02), 12–23. Retrieved from https://journalresearchstream.ijarms.org/index.php/rs/article/view/38

Issue

Section

Research Paper