अभिनव गुप्त के दर्शन की प्रासंगकिता-ईश्वरप्रत्यभिज्ञादर्शन के परिप्रेक्ष्य में

Authors

  • डा० शुचि

Abstract

आचार्य अभिनवगुप्त सम्पूर्ण भारतवर्ष की समस्त ज्ञान-विधाओं एवं साधनों की परंपराओं के समादृत आचार्य हैं, वे अद्वैत आगम एवं प्रत्यभिज्ञा दर्शन के प्रतिनिधि आचार्य तो है ही साथ ही उनमें विभिन्न ज्ञान-विधाओं का भी समन्वय है उनका व्यक्तिव अत्यन्त रहस्यमय है। महाभाष्य के रचयिता पतंजलि को व्याकरण के इतिहास तथा भामतीकार वाचस्पति मिश्र को अद्वैत वेदान्त के इतिहास में जो सम्मान तथा आदरणीय उत्कर्ष प्राप्त है वहीं सम्मान अभिनवगुप्त को तंत्र तथा अलंकारशास्त्र के इतिहास में प्राप्त है, इन्होंने रससिद्धान्त की मनोवैज्ञानिक व्याख्या कर अलंकार शास्त्र को दर्शन के उच्च स्तर पर प्रतिष्ठित किया तथा प्रत्यभिज्ञा और त्रिक दर्शनों को प्रौढ़ भाष्य प्रदान कर इन्हें तर्क की कसौटी पर व्यवस्थित किया।
कूट शब्द- अद्वैत, स्वातन्त्र्यवाद, षिवाद्वैतवाद, प्रत्यभिज्ञा दर्शन, अभिनव गुप्त

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Published

30-04-2025

How to Cite

डा० शुचि. (2025). अभिनव गुप्त के दर्शन की प्रासंगकिता-ईश्वरप्रत्यभिज्ञादर्शन के परिप्रेक्ष्य में. Research Stream EISSN 3049-2610, 2(1), 108–110. Retrieved from https://journalresearchstream.ijarms.org/index.php/rs/article/view/117

Issue

Section

Research Paper