प्राकृतिक संसाधन प्रबन्धनः विभिन्न पक्षों का विश्लेषणात्मक अध्ययन

Authors

  • श्रीमती हेमलता

Abstract

प्राकृतिक संसाधन, प्रकृति द्वारा प्रदत्त वे सामग्रियां हैं जो हमारे पर्यावरण में उपलब्ध हैं और जो हमारे जीवन चक्र को सुचारू रूप से चलाने हेतु उपयोगी हैं। प्राकृतिक संसाधनों के अंतर्गत हवा, पानी, मिट्टी, जीवाश्म ईंधन, खनिज, वन, वनस्पति एवं जीव-जन्तु सभी सम्मिलित हैैं। इन सभी का उपयोग हम भोजन, वस्त्र, औषधियों, आश्रय एवं विभिन्न प्रकार के ऊर्जा स्रोतों की प्राप्ति हेतु करते हैं। मानवीय हस्तक्षेप के कारण इनके प्राकृतिक स्वरूप में निरंतर परिवर्तन हो रहे हैं जिसका कुप्रभाव मानव जाति एवं संपूर्ण जैव विविधता पर पड़ रहा है। भारतीय दर्शन सदैव से ही प्रकृति संरक्षण का संदेश प्रेषित करता रहा है, यही कारण है कि प्राचीन काल से वर्तमान तक हम सभी भावनात्मक रूप से प्रकृति से जुड़े हुए हैं। हमारी पुरातन संस्कृति प्रकृति को पूजनीय मानती आयी है जैसे कि सदानीरा नदियां हों अथवा हमारी धरित्री जो कि माँ स्वरूपा श्रद्धेय मानी गयी है। इसी क्रम में भारतीय संस्कृति में विभिन्न वृक्षों एवं सूर्य एवं चन्द्रमा को भी ईश्वर स्वरूप मानकर पूजा अर्चना की जाती है। कह सकते हैं कि सिर्फ आध्यात्मिक दृष्टिकोण के अनुसार ही नहीं बल्कि वैज्ञानिक क्रिया-कलापों से प्राप्त निष्कर्षों के आधार पर भी प्रकृति है तो मानव जाति का अस्तित्व है अन्यथा हम शून्य हैं।
प्रकृति को संरक्षित करना हम सभी की नैतिक जिम्मेदारी ही नहीं बल्कि जीवन को बचाने हेतु एक अति आवश्यक कदम है। प्राकृतिक संरक्षण के लिए भारत सहित वैश्विक स्तर पर ठोस कदम उठाये जा रहे हैं। हमारे देश की भौगोलिक दशायें नवीकरणीय ऊर्जा संसाधनों के अनुकूल हैं, जिनके सतत् उपयोग के द्वारा पर्यावरणीय प्रदूषण के दुष्परिणामों का स्तर कम किया जा सकता है। जैव विविधता के संरक्षण एवं अक्षय ऊर्जा को बढ़ावा देने एवं इससे सम्बन्धित नीतियों, कार्यक्रमों और योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए मुख्य नोडल एजेन्सी के रूप में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (डवम्थ्ब्ब्. डपदपेजतल व िम्दअपतवदउमदजए थ्वतमेज ंदक ब्सपउंजम ब्ींदहम) का गठन किया गया है। वर्तमान में राष्ट्रीय व अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रकृति के संरक्षण हेतु नवीन नियमों व कानूनों को निर्मित किया गया है जिनमें समय-समय पर संशोधन होते रहते हैं।
मुख्य शब्द- पर्यावरण, प्राकृतिक संसाधन, भारतीय जैव विविधता, दर्शन, नवीकरणीय संसाधन, मानव जाति।

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Published

31-03-2026

How to Cite

श्रीमती हेमलता. (2026). प्राकृतिक संसाधन प्रबन्धनः विभिन्न पक्षों का विश्लेषणात्मक अध्ययन. Research Stream EISSN 3049-2610, 3(01), 273–285. Retrieved from https://journalresearchstream.ijarms.org/index.php/rs/article/view/105

Issue

Section

Research Paper