लोकसाहित्य और डिजिटल युग को चुनौतियाँ
Abstract
लोकसाहित्य किसी समाज की सांस्कृतिक आत्मा का जीवंत दस्तावेज होता है। इसमें जनता के जीवन-अनुभव, परम्पराएँ, रीति-रीवाज, लोककथाएँ, गीत, कहावतें और लोकनायक शामिल होते हैं यह पीढ़ी दर पीढ़ी मौखिक परम्परा के माध्यम से प्रसारित होता आया है, इसलिए इसकी सहजता, भावनात्मकता और सामूहिकता इसकी प्रमुख विशेषताएँ हैं। लेकिन डिजिटल युग में जब मोबाइल और सोशल मीडिया सर्वसुलभ हो गये हैं, तब लोक साहित्य के सामने कई नई चुनौतियाँ उत्पन्न हो गई हैं, जैसे मौखिक परम्परा का क्षरण, प्रमाणीयता का संकट, भाषाई और क्षेत्रीय असमानता, वाणिज्यिक दृष्टिकोण का प्रभाव आदि। फिर भी डिजिटल युग में अवसर भी हैं यदि लोक साहित्य को ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग, यू-ट्यूब चैनलों, पॉडकास्ट और नई पुस्तकों के माध्यम से प्रस्तुत किया जाये, तो वह वैश्विक स्तर पर भी जीवित रह सकता है।
बीज शब्द:- लोक साहित्य संस्कृति, परम्परा, डिजिटल युग, चुनौतियाँ, संरक्षण, लोक भावना।
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Copyright (c) 2026 Research Stream eISSN 3049-2610

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